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ज्योतिषी की भविष्यवाणी से दिल दहला देने वाली विदाई: को-पायलट शांभवी पाठक की अंतिम उड़ान

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Jan 29, 2026

ज्योतिषी की भविष्यवाणी से दिल दहला देने वाली विदाई: को-पायलट शांभवी पाठक की अंतिम उड़ान

 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के बारामती में एक चार्टर्ड लियरजेट 45 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांचों सवारों की मौत हो गई। इस हादसे में को-पायलट शांभवी पाठक भी शामिल थीं, जिनकी दादी मीरा पाठक ने बताया कि ज्योतिषी ने कहा था कि 2026-27 में उनकी पोती नाम रोशन करेगी। लेकिन यह रोशनी इतनी छोटी और दुखद थी। शांभवी ने क्रैश से पहले दादी को 'गुड मॉर्निंग, दादा' मैसेज किया, जो उनकी आखिरी बातचीत बन गई। परिवार में शोक की लहर है, और यह घटना पूरे देश को झकझोर गई है।

 विमान हादसे की पूरी घटना

मुंबई से बारामती जा रहे विमान में अजित पवार जिला परिषद चुनाव के लिए जा रहे थे। सुबह करीब 8:45 बजे लैंडिंग के दौरान कम विजिबिलिटी और कोहरे के कारण पहला प्रयास असफल रहा। दूसरी कोशिश में विमान रनवे से आगे खाई में गिर गया, फ्यूल टैंक फटने से आग लग गई और धमाकों के साथ सब कुछ तबाह हो गया। बचाव दल ने झुलसे शवों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन कोई नहीं बचा। जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रही है, ब्लैक बॉक्स बरामद हो चुका है।

 शांभवी पाठक: सपनों की उड़ान से दुखद अंत

शांभवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली 25 वर्षीय प्रतिभाशाली को-पायलट थीं। उनका बचपन ग्वालियर में बीता, जहां एयरफोर्स विद्या भारती स्कूल से पढ़ाई शुरू हुई। बाद में दिल्ली के एयरफोर्स हायर सेकेंडरी स्कूल और मुंबई यूनिवर्सिटी से एविएशन में डिग्री ली। न्यूजीलैंड से कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग पूरी की और मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब से असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर भी रहीं। उनके पास फ्रोजन एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस था। परिवार में पिता रिटायर्ड एयरफोर्स पायलट थे, जो उड़ान के सपनों को प्रेरित करते थे।

 दादी की आंखों में आंसू और ज्योतिषी की भविष्यवाणी

शांभवी की दादी मीरा पाठक ग्वालियर के बसंत विहार में रहती हैं। वे बताती हैं कि बिजी लाइफ में बातें कम होती थीं, लेकिन जब होतीं तो घंटों चलतीं। शांभवी उन्हें 'दादा' कहकर पुकारती थीं, क्योंकि दादाजी के जाने के बाद दादी ही उनका सहारा बनीं। क्रैश से पहले सुबह 'गुड मॉर्निंग' मैसेज आया। दादी ने याद किया कि कुंडली बनवाने पर ज्योतिषी ने कहा था, "2026-27 में बिटिया नाम रोशन करेगी, पूरे देश में पहचान बनेगी।" लेकिन यह रोशनी मौत के रूप में आई, जिसने परिवार को तोड़ दिया।

 परिवार और देश पर गहरा असर

यह हादसा अजित पवार की राजनीतिक यात्रा और शांभवी जैसे युवा प्रतिभाओं के सपनों को छीन लिया। महाराष्ट्र में शोक की लहर है, राजकीय शोक घोषित हुआ। शांभवी के परिवार ने दिल्ली शिफ्ट होने के बावजूद ग्वालियर की जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा। यह घटना याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। शांभवी की यादें उनके परिवार और एविएशन जगत में हमेशा जीवित रहेंगी, जहां उनकी मेहनत और सपने प्रेरणा बनेंगे।

 

Report By:
Monika