Jan 1, 2026
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक पर बर्बर हमला: धारदार हथियारों से घायल कर जिंदा जलाने की कोशिश
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लक्षित हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। नए साल की पूर्व संध्या पर एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू नागरिक को न केवल बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसे आग के हवाले करने की कोशिश की गई। यह हमला अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है और देश में बढ़ती असहिष्णुता को उजागर करता है।
घटना का विवरण
31 दिसंबर 2025 की शाम को शरियतपुर जिले के दामुद्या क्षेत्र में 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास अपनी दवा की छोटी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक कुछ हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने धारदार हथियारों से खोकन पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद हमलावरों ने उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। सौभाग्य से खोकन पास के एक तालाब में कूदकर आग बुझा सके और अपनी जान बचा ली। गंभीर हालत में उन्हें ढाका के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पृष्ठभूमि में बढ़ती हिंसा
यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की श्रृंखला देखी गई है। दिसंबर में ही मयमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नामक युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को पेड़ से लटकाकर जला दिया। इसके अलावा राजबारी और पिरोजपुर जिलों में भी समान हमले और आगजनी की घटनाएं हुईं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अल्पसंख्यकों में दहशत पैदा कर रही हैं, जबकि प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई की कमी चिंता बढ़ा रही है।
चिंता और अपील
ये लगातार घटनाएं बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता के क्षय को दर्शाती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पड़ोसी देशों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उम्मीद है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और ऐसी घटनाएं थमेंगी।







