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हिंदुत्व सबका स्वभाव है, जाति नहीं: भागवत का युवाओं से संदेश – दुनिया शक्ति की भाषा समझती है

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Jan 3, 2026

हिंदुत्व सबका स्वभाव है, जाति नहीं: भागवत का युवाओं से संदेश – दुनिया शक्ति की भाषा समझती है

भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भोपाल में आयोजित प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद कार्यक्रम में हिंदुत्व की गहन व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू होने का मतलब किसी विशेष जाति या संप्रदाय से नहीं, बल्कि यह सभी के समान स्वभाव और मनोवृत्ति का प्रतीक है। उनके अनुसार, हिंदू नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह विविध पंथों, मतों और परंपराओं का सम्मान करने वाली व्यापक सोच को दर्शाता है।

हिंदू, हिंदवी और भारत – एक ही सूत्र में बंधे

डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू, हिंदवी तथा भारत ये तीनों शब्द एक ही अर्थ रखते हैं। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि भारत की मूल प्रकृति और सनातन संस्कृति का सार है। संघ का विचार कोई नया नहीं, बल्कि प्राचीन काल से चला आ रहा है जो आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। हिंदुत्व सभी को एक सूत्र में बांधता है और समाज को एकजुट रखता है।

संघ को भाजपा से अलग समझें

सरसंघचालक ने जोर देकर कहा कि भाजपा या अन्य संगठनों को देखकर संघ को न आंकें। भाजपा, विश्व हिंदू परिषद या विद्या भारती जैसे संगठनों का कार्यक्षेत्र और तरीका अलग है। संघ का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार है। वह ऐसे समर्पित स्वयंसेवक तैयार करता है जो बिना स्वार्थ के समाज की गुणवत्ता सुधारने में लगे रहें।

शक्ति ही दुनिया की भाषा है

युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि दुनिया सत्य की नहीं, शक्ति की बात सुनती है। दुर्बल व्यक्ति सत्य भी बोले तो अनसुना रह जाता है, जबकि शक्तिशाली की हर बात सुनी जाती है। विश्व को भारत से नई दिशा की उम्मीद है, इसलिए युवाओं को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनना होगा। संघ का लक्ष्य संगठित समाज की शक्ति से धर्म की रक्षा करते हुए देश को सर्वोच्च वैभव पर पहुंचाना है।

 

Report By:
Monika