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भारत-जर्मनी की मेगा डील: 6 स्टील्थ पनडुब्बियां मजबूत करेंगी समुद्री सुरक्षा

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Jan 12, 2026

भारत-जर्मनी की मेगा डील: 6 स्टील्थ पनडुब्बियां मजबूत करेंगी समुद्री सुरक्षा

 भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। प्रोजेक्ट 75(I) के तहत 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए मुंबई की मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच समझौता हो चुका है। करीब 8 बिलियन डॉलर (लगभग 72 हजार करोड़ रुपये) की यह डील भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में शुमार है। एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के नीचे छिपकर ऑपरेशन कर सकेंगी।

 AIP तकनीक से मिलेगी घातक ताकत

AIP यानी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी के नीचे रहने की क्षमता देती है। इससे शोर बहुत कम होता है और दुश्मन के सोनार से बचना आसान हो जाता है। ये पनडुब्बियां चुपचाप दुश्मन की निगरानी कर सकती हैं और अचानक हमला बोल सकती हैं, जो आधुनिक युद्ध में इन्हें बेहद खतरनाक बनाता है।

 हथियारों से लैस घातक मशीनें

इन पनडुब्बियों में मुख्य हथियार 533 मिमी कैलिबर के भारी टॉरपीडो होंगे, जो दुश्मन पनडुब्बियों और सतह के जहाजों को सटीक निशाना बना सकते हैं। साथ ही एंटी-शिप मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और समुद्री माइन भी लगाए जा सकते हैं, जो इन्हें बहुमुखी बनाते हैं।

 मेक इन इंडिया को नया बल

ये सभी पनडुब्बियां भारत में MDL द्वारा बनाई जाएंगी, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत बढ़ावा मिलेगा। जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की निर्माण क्षमता का यह संयोजन नौसेना को रणनीतिक बढ़त देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं, जो दोनों देशों के मजबूत विश्वास को दिखाता है।

 हिंद महासागर में भारत की मजबूती

इन स्टील्थ पनडुब्बियों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी, प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा। बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच यह परियोजना भारत के डिफेंस सिस्टम को नई ऊर्जा देगी।

 

Report By:
Monika