Jan 22, 2026
बसंत पंचमी 2026: क्यों पीले वस्त्र पहनना माना जाता है सौभाग्य और ज्ञान का प्रतीक?
भारत को त्योहारों की भूमि कहा जाता है, जहां हर ऋतु अपने साथ खुशियों और परंपराओं की सौगात लेकर आती है। बसंत पंचमी ऐसा ही एक पावन पर्व है, जो बसंत ऋतु के आगमन और विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह पर्व 23 जनवरी को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन इसके पीछे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं।
धार्मिक मान्यताएं: मां सरस्वती और पीले रंग का संबंध
बसंत पंचमी को देवी सरस्वती का विशेष दिन माना जाता है। पीला रंग ज्ञान, शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक है, इसलिए भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले पुष्प अर्पित कर देवी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही हल्दी, सोना और सरसों के फूल जैसे पीले तत्व भारतीय संस्कृति में शुभता और समृद्धि का संकेत माने जाते हैं। मान्यता है कि इस रंग को धारण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रकृति से जुड़ाव: बसंत ऋतु का रंग
बसंत के आगमन के साथ खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं और प्रकृति नए जीवन से भर जाती है। ऐसे में पीले कपड़े पहनना प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रतीक बन जाता है। यह रंग न केवल मौसम के बदलाव को दर्शाता है, बल्कि नई शुरुआत और उत्साह का संदेश भी देता है।
सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव
इस दिन घरों में पीले रंग के पकवान जैसे केसरिया खीर, बूंदी, हलवा और मीठे चावल बनाए जाते हैं। लोग पीले वस्त्र पहनकर पूजा-अर्चना करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। रंगों के इस उत्सव में पीला रंग ऊर्जा, रचनात्मकता और उल्लास का प्रतीक बनकर उभरता है, जो शिक्षा और कला के भाव से गहराई से जुड़ा हुआ है।
वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलू
रंग विज्ञान के अनुसार पीला रंग मस्तिष्क को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है। यह एकाग्रता, स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे विद्यार्थी विशेष लाभ महसूस करते हैं। सूर्य से जुड़े इस रंग को देखने मात्र से मन में खुशी और आशावाद का संचार होता है, जो तनाव को कम करने में सहायक होता है। बदलते मौसम में होने वाली सुस्ती को दूर करने में भी यह रंग उपयोगी माना जाता है।
परंपरा और विज्ञान का सुंदर संगम
बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने की परंपरा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रकृति, मनोविज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम दिखाई देता है। यही कारण है कि यह पर्व हर वर्ष नई ऊर्जा, ज्ञान और सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है।







