Jan 10, 2026
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में बाबर सत्र पर भड़का बवाल: हिंदू संगठनों का कड़ा विरोध!
भोपाल की साहित्यिक दुनिया एक बार फिर गरमा गई है। भारत भवन में आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित उत्सव, जहां विचारों का आदान-प्रदान होता है, अब एक संवेदनशील विषय पर विवाद का केंद्र बन गया है। एक विशेष सत्र 'बाबर क्वेस्ट फॉर हिंदूइज्म' को लेकर हिंदू संगठनों ने तीव्र विरोध जताया है, जिससे पूरा माहौल तनावपूर्ण हो उठा है।
विवाद की जड़ें गहरी
यह सत्र मुगल शासक बाबर के जीवन और उनके भारत के प्रति दृष्टिकोण पर केंद्रित है। आयोजकों का मानना है कि यह ऐतिहासिक खोज और संवाद का माध्यम बनेगा, लेकिन विरोधियों का कहना है कि बाबर को एक आक्रांता के रूप में देखा जाता है, जिनके कार्यों ने हिंदू समाज पर गहरा प्रभाव डाला। हिंदू संगठनों ने इसे महिमामंडन का प्रयास करार दिया है और पोस्टरों में बदलाव की मांग की।
हिंदू संगठनों की कड़ी चेतावनी
संस्कृति बचाओ मंच और अन्य हिंदू समितियों ने स्पष्ट कहा है कि बाबर जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़े विषय समाज में टकराव पैदा कर सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सत्र आगे बढ़ा तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा। भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह उनका साफ संदेश है। उन्होंने आयोजकों से सत्र रद्द करने और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी उठ चुके ऐसे सवाल
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल अपनी विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन विषय चयन को लेकर पहले भी आलोचनाएं होती रही हैं। यह आयोजन साहित्य, कला और संस्कृति का मंच है, जहां नए विचारों को जगह मिलती है, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर बहस तेज हो जाती है। इस बार का विवाद आयोजन की शुरुआत से पहले ही गरमागरम बहस छेड़ चुका है।
संवाद या टकराव?
यह घटना एक बड़े सवाल को जन्म दे रही है - क्या ऐतिहासिक व्यक्तियों पर खुली चर्चा संभव है या यह हमेशा भावनाओं को आहत करती है? उत्सव का उद्देश्य विचारों का आदान-प्रदान है, लेकिन विरोध ने इसे नई चुनौती दे दी है। भोपाल की साहित्यिक विरासत अब इस विवाद से जूझ रही है।








