Jan 15, 2026
सीएम मोहन यादव ने बताई AI में बुद्धि की तीन परतें: यंत्र, मंत्र, तंत्र से आगे षड्यंत्र का सबसे बड़ा खतरा!
भोपाल में आयोजित रीजनल AI इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय दर्शन और आधुनिक तकनीक को जोड़ते हुए गहन संदेश दिया। उन्होंने बुद्धि के तीन प्रकार बताए और चेतावनी दी कि दुनिया मंत्र, यंत्र, तंत्र में उलझी है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा षड्यंत्र का है। AI को जनकल्याण के लिए अपनाते हुए मानव मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया गया।
भारतीय परंपरा से जुड़ी AI की व्याख्या
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को ज्ञान की भूमि बताते हुए सांदीपनि आश्रम और ओंकारेश्वर का जिक्र किया। उन्होंने तिरुपति बालाजी की मजेदार कथा सुनाकर मंच पर हल्का माहौल बनाया और कहा कि विवेक से AI को नियंत्रित करना होगा, वरना प्रगति में मूल प्रकृति खो सकती है। भगवान गणेश की पृथ्वी परिक्रमा वाली कथा से भारतीय बुद्धिमत्ता का उदाहरण दिया।
बुद्धि के तीन प्रकार और षड्यंत्र का संकट
डॉ. यादव ने बुद्धि को तीन भागों में बांटा—मांत्रिक बुद्धि, यांत्रिक बुद्धि और तांत्रिक बुद्धि। कहा कि आज का दौर इन तीनों में उलझा है, लेकिन इनसे कहीं अधिक प्रभावशाली षड्यंत्र है। भावनात्मक, रचनात्मक और प्रतिक्रियात्मक क्षेत्रों में बारीक अंतर समझकर ही AI का सही उपयोग संभव है।
मध्य प्रदेश की AI नीति और मिशन की घोषणा
राज्य सरकार जल्द AI नीति लाएगी और AI मिशन शुरू करेगी। स्पेसटेक पॉलिसी हाल ही में जारी हुई है। माइनिंग, हेल्थ, कृषि जैसे क्षेत्रों में AI की अपार संभावनाएं हैं। नौ करोड़ की आबादी वाले राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं में AI को प्रमुखता दी जाएगी।
कुपोषण, बीमारी और कृषि में AI का उपयोग
कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि WHO स्टैंडर्ड के साथ AI से अगले तीन महीनों में कुपोषित बच्चों का अनुमान लगाया जाएगा। वेक्टर बॉर्न डिजीज के आउटब्रेक का पूर्वानुमान और कृषि में फसल-मौसम सुधार के लिए AI अपनाया जा रहा है। भारत ग्लोबल AI में तीसरे स्थान पर है।
कौशल विकास और भविष्य की चुनौतियां
30 AI लैब, पॉलिटेक्निक में लैब, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कुंभ में AI एप्लिकेशन तैयार होंगे। AI से नौकरियां नहीं जाएंगी, बल्कि भूमिकाएं बदलेगी। स्किलिंग-रिस्किलिंग पर फोकस जरूरी है। भारतीय मॉडल से वैश्विक समस्याओं का समाधान संभव, लेकिन साइबर जोखिमों से बचाव के लिए मजबूत फ्रेमवर्क चाहिए।







