Jan 19, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई विजय शाह की माफी: 'बहुत देर हो चुकी है', कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी पर मुकदमा चलाने का रास्ता साफ !
मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के अंदर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर फैसला करने का निर्देश दिया है। साथ ही, मंत्री की माफी को खारिज करते हुए कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है। यह मामला देश की सेना की बहादुर अधिकारी की गरिमा से जुड़ा है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विवाद की शुरुआत और मूल घटना
यह पूरा विवाद मई २०२५ में तब शुरू हुआ जब इंदौर के महू क्षेत्र में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद देशव्यापी आक्रोश फैल गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए १४ मई को इंदौर के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा १५२, १९६(१)(बी) और १९७(१)(सी) के तहत देशद्रोह, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने हालिया सुनवाई में राज्य सरकार पर सवाल उठाया कि एसआईटी की चार्जशीट के बाद भी मुकदमा चलाने की मंजूरी क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लिया जाए। एसआईटी ने पहले ही अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है, लेकिन मंजूरी का इंतजार है। कोर्ट ने कहा कि मामला लंबित होने के कारण देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री की माफी पर कोर्ट का तीखा जवाब
मंत्री विजय शाह के वकील ने कोर्ट में माफी का हवाला दिया, लेकिन बेंच ने साफ कहा, “अब बहुत देर हो गई है।” कोर्ट ने पहले भी उनकी ऑनलाइन माफी को अपर्याप्त और अप्रभावी बताया था। यह टिप्पणी न केवल एक अधिकारी की गरिमा पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच पर भी नजर रखी जा रही है।
अतिरिक्त विवादों की जांच SIT को सौंपी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि विजय शाह से जुड़े अन्य संबंधित विवादों को भी विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपा जाए। इससे मामले की जांच और व्यापक हो गई है। कोर्ट का यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और न्याय की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े। इस फैसले से मंत्री की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।







